शिव की महिमा का वर्णन पुराणों में मिलता है

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जनकल्याण की भावना, देश की खुशहाली व सत्य सनातन धर्म की कामना के संकल्प को लेकर श्रावण मास के दूसरे सोमवार को रुद्राभिषेक किया गया। आचार्य पंडित शैलेश चतुर्वेदी के पावन सानिध्य में भगवान रुद्र के सहस्त्र नामों का अर्चन कर कई तीर्थों के पवित्र जल से जलाभिषेक, दूध, दही ,घृत ,शक्कर, शहद, गुलाबजल, फलों के जूस पंचामृत आदि द्रव्यों से देवों के देव महादेव महाकाल महामृत्युंजय आशुतोष शशांक शेखर भगवान का रुद्राभिषेक किया गया। भगवान को अति प्रिय फल, फूल ,मिष्ठान, बेलपत्र ,शमीपत्र, दूर्वा, आक के फूल , भांग धतूरा व नैवेद्य अर्पित कर नमक चमक मंत्रों द्वारा विशेष विशेष पूजा अर्चना की गई।
राष्ट्रीय विप्र एकता मंच के राष्ट्रीय सचिव तरुण चतुर्वेदी,शकुन्तला चतुर्वेदी, लवली चतुर्वेदी, परी चतुर्वेदी, वंश चतुर्वेदी आदि ने भगवान रूद्र के सहस्त्रनाम, शिव तांडव, स्तोत्रम, रुद्राष्टकम, लिंगाष्टकम आदि की स्तुति मंगलाचरण अर्चन कर देवों के देव महादेव की जनकल्याणकारी पूजा की गई।
श्री शैलेश चतुर्वेदी ने कहा कि शिव ने कालकूट नामक विष पिया था जो अमृत मंथन के दौरान निकला था। शिव ने भस्मासुर को जो वरदान दिया था उसके जाल में वे खुद ही फँस गए थे। शिव ने दक्ष के यज्ञ को नष्ट कर दिया था। ब्रह्मा द्वारा छल किए जाने पर शिव ने ब्रह्मा को शापित कर विष्णु को वरदान दिया था। शिव की महिमा का वर्णन पुराणों में मिलता है।

INPUT – VINAY CHATURVEDI 

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